Categories
moral stories moral stories for adults moral stories for kids moral stories hindi moral stories in hindi moral stories kids moral stories short in hindi

मित्र की परख कैसे करें? (Dost kaise banaye) 1 सच्ची कहानी

इस बदलती दुनिया में लोगो के बहुत से दोस्त होते हैं जो लगते तो आपके दोस्त हैं पर काम पड़ने पर भाग खड़े होते हैं तो सवाल ये आता है की Dost kaise banaye जो मुसीबत में काम आयें

इस बदलती दुनिया में लोगो के बहुत से दोस्त होते हैं।

जो लगते तो आपके दोस्त हैं पर काम पड़ने पर भाग खड़े होते हैं तो सवाल ये आता है की Dost kaise banaye जो मुसीबत में काम आयें।

 

 

ज़िन्दगी में हम बहुत लोगो से मिलते हैं। लेकिन उनमे से कुछ ही हमारे दोस्त बनते  हैं। और बहुत कम ही हमारे best friend बनते हैं।

लेकिन हम अपनी ज़िंदगी मे अपने दोस्तों को क्या सही से चुन पाते हैं?

क्या हम जिन दोस्तो को बेस्ट फ्रेंड बनाते हैं क्या वो सच मे आपके बेस्ट फ्रेंड बनने लायक होते हैं?

तो सवाल ये हैं कि हमे कैसे फ्रेंड बनाने चाहिए? तो आईये इस बात को एक कहानी की मदद से समझते हैं-

Dost kaise banaye ( कहानी )



बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में सूरज नाम का एक लड़का रहता था,उसके बहुत सारे दोस्त थे। वो भी बहुत अच्छे अच्छे दोस्त थे।

वो उनके साथ अपना पूरा पूरा दिन बिता देता था। सभी दोस्त खूब मस्ती करते थे, साथ साथ घूमने जाते और साथ साथ पढ़ाई भी करते थे।

लेकिन ये सब बातें उसके पिता संजय को नही पसंद थी। क्योंकि उसे लगता था कि उसके बेटे कर दोस्त अच्छे नही हैं।

तो उसने ये बात सूरज से कही। लेकिन सूरज ने उस बात को नही माना। और कहा कि आप गलत हैं।

मेरे दोस्त बहुत अच्छे हैं। हम पूरा दिन साथ बिताते हैं। आपको क्यों बुरे लगते हैं मुझे नही पता।

संजय का सिर्फ एक दोस्त था जो उसका बहुत अच्छा दोस्त  था। लेकिन वो रोज़ नही मिलते थे।

 

 
 
 संजय ने सूरज से कहा कि मैं तुम्हारे दोस्त की परीक्षा लेने चाहता हूं। मैं जानना चाहता हूं कि क्या वो सच मे अच्छे दोस्त हैं या सिर्फ ऐसे ही हैं।
 
 
सूरज तैयार हो गया उसने कहा ठीक है मैं तैयार हूँ आपका जैसा मन परीक्षा लीजिये मेरे दोस्त ज़रूर पास हो जायेंगे।
 
 
संजय ने कहा ठीक है तो आज रात 1 बजे हम तुम्हारे सबसे अच्छे दोस्त के घर चलेंगे।
सूरज मान गया। रात को सूरज अपने पिता के साथ अपने दोस्त के घर गया और अपने दोस्त को पुकारा।
 
 
 

 काफी पुकारने के बाद भी उसका दोस्त नही आया।

फिर थोड़ी देर बात उन्होंने आवाज़ सुनी की उसका दोस्त अपनी माँ से कह रहा है कि माँ उनसे कह दे कि मैं घर पर नही हूँ।

सूरज को बहुत बुरा लगा उसका सिर शर्म से झुक गया।

फिर उसके पिता उसको अपने दोस्त के घर ले गए।

वहां उन्होंने अपने दोस्त को बुलाया। अंदर से आवाज़ आयी आ रहा हूँ मित्र रुके रहना।

थोड़ी देर बाद संजय का दोस्त एक हाथ मे पैसा और दूसरे में लाठी लिए खड़ा था।

संजय ने पूछा कि ये किसलिए मैंने तो सिर्फ तुम्हे बुलाया है।

दोस्त ने कहा हाँ लेकिन रात को मेरा दोस्त मेरे घर आया कोई ज़रूरी काम होगा या तो पैसे का या कोई झगड़ा हुआ होगा तो मैं दोनो ले आया।

ये सुनकर सूरज को समझ आ गया कि दोस्त आखिर कैसे होने चाहिए।

ज्ञान- दोस्त वो नही जो दिन भर आपके साथ रहे आपके साथ घूमे असली दोस्त वो है जो आपके दुख में आपके साथ रहे।
ज़िन्दगी में दोस्त कम बनाये लेकिन जांच परख कर बनाये जो सच मे दोस्त बनने लायक हों।

इस कहानी से आपको पता चल गया होगा की जो मित्र आपके साथ हमेशा रहे ज़रूरी नहीं की वो आपका सच्चा मित्र हो शायद मुसीबत पड़ने पर वो आपके काम न आये।

 
ALL IMAGES SOURCE- http://clipart-library.com
 
 
तो दोस्तों comment करके ज़रूर बताएं की Dost kaise banaye या pakke dost kaise banaye के बारे में इस पोस्ट से आपको कोई लाभ हुआ या नहीं।
 
read more- ( AALSI BETA) [बच्चो की हिंदी कहानी ( आलसी बेटे) 1 शिक्षाप्रद कहानी

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *