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Hindi Kahaniya : Motivational stories in hindi पढ़ाई का जुनून (part-2)

आप पढ़ रहे हैं पढ़ाई का जुनून। ये Hindi Kahaniya , Motivational stories in hindi की हैं। इसमें अभी तक आपने पढ़ा कि एक लड़का जो पढ़ना चबाता है चोरी से पढ़ता है लेकिन पकड़े जाने पर टीचर उसे बहुत मारते हैं और चपरासी को उसे एक रूम में बंद करने का आदेश देते हैं
READ 1ST PART-पढ़ाई का जुनून(part-1)

 उस दिन पता चला था कि इस दुनिया मे सच मे भगवान हैं और वो हमसे दूर नही है आस पास ही हैं बस हम उन्हें पहचान नही पाते या शायद वो खुद को दिखाना ही नही चाहते बस जिसको जरूरत होती है उसके पास ही आते हैं।
                            रात के यही कोई 10 बजे होंगे जब वो भगवान मेरे घर आये। मुझे तो समझ ही नही आ रहा था उन्हें कहाँ बिठाऊँ फटी हुई बोरी पर या टूटी हुई चारपाई पर जिसपर बैठने से शायद चारपाई टूट जाती। लेकिन वो तो भगवान थे वो शायद मेंरी परेशानी समझते थे और घर के बाहर वाले चबूतरे पर बैठ गए।
                            उन्होंने पापा से बात करना शुरू किया “आपका बेटा पढ़ना चाहता है मैं चाहता हूँ कि आप उसका प्रवेश पास के विद्यालय में करा दें। उसका सारा खर्चा मैं दूंगा।” यह सुनकर पापा ने मेरी तरफ देखा मैं सर झुकाये खड़ा था। फिर उनकी तरफ देखकर कहा ठीक है। उन्होंने पापा के हाथ पर कुछ पैसे रखते हुए कहा कि इन पैसों से कल प्रवेश करा दीजिए। मेरा नाम किशोर है और मैं उसी विद्यालय में चपरासी हूँ और साथ मे पढ़ाई भी करता हूँ।
                            अगली सुबह मैं जल्दी ही तैयार हो गया। आखिर वो दिन आ गया था जिसका मुझे इंतज़ार था। आज मेरा प्रवेश होना था। मेरे प्रवेश के काम के बाद पापा ने  कहा बेटा किशोर जी भगवान का रूप हैं तुम मुझे चाहो कुछ न देना लेकिन उनका पूरा ख्याल रखना खूब पढ़ाई करना और जब बड़े हो जाना तो उनके जैसा बनना।

                             मैंने वैसा ही किया और खूब मन लगा कर पढ़ाई की और कंप्यूटर इंजीनियर बना। आज मेरे पास बहुत दौलत है लेकिन इतनी नही की अपने सर का कर्ज उतार सकूँ। समझ नही आता मैं अब भी गरीब हूँ या अमीर। पता नही आगे क्या क्या सोचता कि तभी मेरे सर आ गए जो पहले चपरासी थे और आज उसी विद्यालय में प्रधानाचार्य बन गए हैं।
                               उन्होंने देखते ही कहा अरे! शेखर कैसे हो? ठीक हूँ मैंने उनके चरण छूते हुए कहा। हम अंदर आफिस में गए और मैने उनके हाथ मे 1 लाख का चेक थमाते हुए कहा गुरुजी इस महीने की राशि।
                                उन्होंने कहा शेखर अगर सब दान ही कर दोगे गरीब बच्चो की पढ़ाई पर तो खुद के लिए क्या बचेगा और क्यों करते हो ऐसा? मैंने हंसते हुए कहा गुरुजी इसके बाद भी मेरे पास 1 लाख बचता है जो कि बहुत है। और मैं ऐसा इसलिए करता हूँ क्योंकि कुछ साल पहले किसी ने मेरे लिए भी ऐसा ही किया था तभी मैं यहां हूँ और मैं अब उनको अगर जान भी दे दूं तो भी कर्ज़ खत्म न होगा। ये सुनकर उन्होंने मुझे गले से लगा लिया।

शिक्षा- अगर किसी ने आपकी भलाई की है तो आप भी लोगो की भलाई करें।

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