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HINDI KAHANIYA :-MORAL STORIES IN HINDI राज्य का महामूर्ख कौन? मंत्री सुमेर की कहानियाँ (कहानी-1)

ये कहानी राजा सूर्यभान और उनके मंत्री सुमेर के ऊपर हैं। ये Moral stories in hindi के अंतर्गत पूर्णतः काल्पनिक हैं।

ये सभी HINDI KAHANIYA, ज्ञान देने वाली( MORAL STORIES हैं और तो और कुछ KAHANIYAAN हास्यास्पद भी हैं।( HINDI FUNNY STORIES)

बहुत समय पहले की बात है। एक राज्य था रामगढ़ ।वहां के राजा सूर्यभान थे। उनके मंत्रियों में एक मंत्री थे सुमेर पंडित। जो कि बहुत ही बुद्धिमान थे। उनके बुद्धिमानी का लोहा बड़े बड़े लोग मानते थे।

एक बार की बात है। राजा सूर्यभानजी ने सुमेर से कहा कि पता करो की राज्य में कितने मूर्ख हैं? और उनमें सबसे ज्यादा मूर्ख कौन है? सबकी एक लिस्ट बना कर मुझे दो।

सुमेर ने कहा जैसी आपकी आज्ञा महाराज! लेकिन इस लिस्ट को बनाने में समय लगेगा। कम से कम एक महीने का वक़्त दें मुझे। राजा ने उनकी बात मान ली।

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इस बात को 10 दिन बीत गए। एक दिन राजा के दरबार मे एक दूर देश का एक व्यापारी आया।उसने कहा कि महाराज मेरे पास बहुत अच्छे अच्छे और मजबूत रथ हैं। मैं चाहता हूं की आप उसे खरीदें।

राजा ने रथ देखने की इच्छा प्रकट की। तो व्यापारी ने कहा की महाराज! इस वक़्त तो मैं सिर्फ एक रथ ही लाया हूँ। उसमे से जिससे मैं खुद आया हूँ मैं आपको वो रथ दिखा तो सकता हूँ, लेकिन दे नही सकता। लेकिन अगर आप रथ लेना चाहते हैं। तो मैं आपको वो रथ लेकर दे दूंगा लेकिन उसमें वक़्त लगेगा। और मुझे कुछ पैसे अभी चाहिए होंगे। राजा ने उसकी बात मान ली। और रथ देखने गए। उन्होंने रथ देखा तो वो सच मे बहुत मजबूत था। और उसकी बनावट बाकी सभी रथो से बहुत अलग थी। वो बहुत ही खूबसूरत लग रहा था। राजा ने 100 रथ लेने के लिए कहा और 50 रथो का दाम पहले ही देकर उसे विदा किया।

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राजा बहुत खुश था की अब उसके पास बहुत खूबसूरत और अच्छे अच्छे रथ होंगे।
धीरे धीरे वक़्त बीतता गया। और सुमेर को दिया 1 महीने का वक़्त खत्म हो गया। तो राजा ने सुमेर को राजदरबार में बुलाया और लिस्ट दिखाने को कहा।
सुमेर ने कहा कि महाराज मैं आपको लिस्ट दिखाने को तैयार हूं। पर आप वचन दीजिये की आप मुझ पर तनिक भी गुस्सा नही होंगे। राजा ने वचन दिया तो सुमेर ने लिस्ट दिखाई। मूर्खो की लिस्ट में सबसे ऊपर अपना नाम देखकर राजा बहुत गुस्सा हुआ। और दूसरे स्थान पर रानी का नाम देखकर तो बस गुस्से का अंबार टूट पड़ा ।
लेकिन मरता क्या न करता  वचन दे चुका था। इसलिए गुस्सा छिपाते हुए मंत्री से पूछा कि सबसे ऊपर मेरा नाम क्यों है? मंत्री ने कहा महाराज उस दिन आप उस व्यापारी को जानते भी नही थे और उसको 50 रथो का दाम देकर भेजा जो की कभी वापस नही आएगा। तो आप सबसे बड़े मूर्ख हुए न। राजा ने कहा तो दूसरे स्थान पर रानी का नाम क्यों? तो मंत्री ने कहा महाराज जिसने मूर्ख के साथ रहने का निर्णय किया वो भी तो मूर्ख है ना।
कुछ रुककर राजा ने पूछा कि मान लो अगर वो व्यापारी वापस आकर मुझे रथ देता है। तो तुम क्या करोगे। सुमेर ने कहा कि महाराज तो मैं इस लिस्ट से आपका और रानीजी का नाम हटाकर उसका और उसके पत्नी का नाम लिख दूंगा।

शिक्षा- कभी किसी को पूरी तरह जाने बिना उस पर भरोसा न करें।

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