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BINA EARPHONE KE MOBILE ME RADIO KYU NAHI CHALTA

बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता ? number 1 reason

बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता ? ये सवाल हर उस इंसान के मन मे होता है, जो मोबाइल में रेडियो का उपयोग करता है।

बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता ? ये सवाल हर उस इंसान के मन मे होता है, जो मोबाइल में रेडियो का उपयोग करता है।

आज हम बात करेंगे की मोबाइल में रेडियो चलाने के लिए इअरफ़ोन की ज़रुरत क्यों पड़ती है।

आखिर क्या वजह की बिना इअरफ़ोन के मोबाइल में रेडियो या FM नहीं चलता है।

आजकल हमारी दुनिया की टेक्नोलॉजी बहुत आगे हो गयी है।

लेकिन जब बात आती है मोबाइल में रेडियो चलाने की, तो आज भी हमे उसके लिए मोबाइल में इअरफ़ोन लगाना पड़ता है।

हमे ये इअरफ़ोन लगाना बहुत बुरा लगता है।

साथ ही साथ सवाल भी आता है। वह यह कि हमारी टेक्नोलॉजी क्या अभी इतनी आगे नहीं हुई की बिना इअरफ़ोन के मोबाइल में रेडियो चला सके ?

इस बात का जवाब जानने से पहले जानना ये ज़रूरी है।कि

FM या रेडियो चलता कैसे है ?

हम जानते हैं की रेडियो के चैनल को चलाने के लिए रेडियो स्टेशन होता है। जहाँ से उस चैनल का प्रसारण होता है।

हम ये भी जानते हैं की रेडियो तभी चलता है जब हम उसी फ्रीक्वेंसी पर लगाते हैं जिस पर वो चैनल होता है।

सभी चैनल की अलग अलग फ्रीक्वेंसी होती है। अगर हम चैनल की फ्रीक्वेंसी पर नहीं लगाते तो वो चैनल नहीं चलेगा।

रेडियो में ऐसा यन्त्र लगा होता है जो उस फ्रीक्वेंसी को पकड़ता है तभी चैनल चलता है।

जब हम रेडियो में कोई फ्रीक्वेंसी लगाते हैं, तो उसका मतलब होता है की हम रेडियो को आदेश दे रहे हैं की इस फ्रीक्वेंसी की कोई तरंग (wave) अगर किसी रेडियो स्टेशन से आ रही हो तो उसे कैच करे।

साथ ही साथ उस पर जो भी सन्देश आ रहा हो वो हमे सुनाये।

अगर रेडियो में ऐसा यन्त्र न लगा होता तो रेडियो सभी स्टेशन को एक साथ कैच करता। और हमे समझ ही नहीं आता की आखिर रेडियो में चल क्या रहा है।

सभी रेडियो स्टेशन की फ्रीक्वेंसी इसलिए अलग अलग रखी जाती है।

ताकि रेडियो एक बार में एक ही तरह के तरंग को कैच करे और एक ही चैनल आये। अगर सबकी फ्रीक्वेंसी एक ही हो जाती तो सब चैनल एक साथ आते।

बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता ?

इअरफ़ोन मोबाइल में रेडियो के लिए उसी तरह काम करता है जैसे रेडियो में अन्टीना।

इअरफ़ोन का तार भी उसी मैटेरियल (पदार्थ) का बना होता है जिसका अन्टीना।

इसलिए मोबाइल में ऐसी सेटिंग की जाती है की बिना इअरफ़ोन के रेडियो न चले।

मोबाइल में जो इअरफ़ोन का जैक होता है उसी में रेडियो के यन्त्र का तार जुड़ा होता है।

और सेटिंग होती है की जब तक इअरफ़ोन न लगे ये यन्त्र काम न करे। इसलिए जब तक इअरफ़ोन नहीं लगाते हैं रेडियो नहीं चलता है।

असलियत यह है की बिना इअरफ़ोन के मोबाइल में रेडियो चल सकता है।

लेकिन जैसा की मैंने आपको पहले ही बताया की इअरफ़ोन अन्टीना की तरह काम करता है, तो अगर अन्टीना नहीं होगा तो सिग्नल नहीं पकड़ेगा।इसलिए रेडियो का कोई भी चैनल नहीं चलेगा।

 

बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता ?
यह भी एक कारण – ‘ बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता ?’

बड़ी सिटीज में स्टेशन पास पास होते हैं इसलिए बिना अन्टीना के भी सिग्नल पकड़ सकता है।

लेकिन जहाँ स्टेशन दूर हैं वहां सिग्नल नहीं कैच करेगा। तो बिना अन्टीना या इअरफ़ोन के रेडियो चलाने का कोई मतलब नहीं अगर कोई सिग्नल ही न पकडे।

2012 से 2014 में कुछ ऐसे मोबाइल आये थे जिनमें बिना इअरफ़ोन के रेडियो चलता था।

लेकिन फिर उनको बाद में ये बात समझ में आ गयी। और तब उन्होंने वो सेटिंग करना फिर शुरू कर दिया।

क्या किसी मोबाइल में एप्लीकेशन डाल कर रेडियो चला सकते हैं?

नहीं, किसी मोबाइल में अगर FM नहीं है तो हम एप्लीकेशन डालकर FM नहीं चला सकते।

अब ये बात भी जानना ज़रूरी है की ऐसा क्यों है? हम एप्लीकेशन डालकर रेडियो क्यों नहीं चला सकते?

दरअसल बात ये है की रेडियो चलाने के लिए कुछ यंत्रो का होना ज़रूरी है। वो यंत्र हार्डवेयर में होता है और किसी एप्लीकेशन के डाउनलोड होने से हार्डवेयर में कोई परिवर्तन नहीं आता।

इसलिए किसी एप्लीकेशन को डाउनलोड करके रेडियो को नहीं चलाया जा सकता।

रेडियो सिर्फ उस मोबाइल में ही चलेगा जिसमे वो पहले से हो। साथ ही साथ वो यन्त्र लगे हों जो की रेडियो में ज़रूरी हैं।

क्या मोबाइल में पहले से अन्टीना नहीं होता, जो हमे इअरफ़ोन को अन्टीना की तरह उपयोग करना पड़ता है?

रेडियो चलाने के लिए लोगो के मन में ये सवाल भी आता है। क्या मोबाइल के अन्दर अन्टीना नहीं होता? जो हमे अलग से रेडियो के लिए अन्टीना लगाना पड़ता है?

इसका जवाब है मोबाइल के अन्दर अन्टीना लगा होता है।

लेकिन वो इतना बड़ा और अच्छा नहीं होता की वो रेडियो की फ्रीक्वेंसी को अच्छे से कैच कर सके।

वो अन्टीना सिर्फ कॉल के लिए नेटवर्क या इन्टरनेट कैच करने के लिए होता है।

रेडियो की फ्रीक्वेंसी को उस अन्टीना के द्वारा कैच करना कठिन होता है। इसलिए हमे इअरफ़ोन के रूप में अलग अन्टीना लगाना पड़ता है।

मोबाइल में साफ़ रेडियो कैसे सुने? 

आपने देखा होगा की लोग पहले साफ़ टीवी देखने के लिए छत पर एल्युमीनियम का अन्टीना लगाते थे।

बिलकुल वैसे ही आपको भी अपने इअरफ़ोन वाले जगह से लम्बा तार जोड़ना होगा। तार जितना लम्बा होगा वो उतना साफ़ रेडियो मोबाइल में चलने में सहायता करेगा।

ये तार किसी धातु का होना चाहिए जैसे- कॉपर, एल्युमीनियम या लोहा। आप इस तार को इअरफ़ोन वाले पिन में फंसा दीजिये।

और फिर उसको किसी उंचाई वाली जगह पर ले जाईये। तब आप मोबाइल में साफ़ रेडियो सुन पायेंगे।

दूसरा तरीका ये है की आप एक ऐसा ख़राब इअरफ़ोन लें जिसका पिन तो सही हो लेकिन आवाज़ न आती हो।

उस इअरफ़ोन को मोबाइल में लगाईये। उस इअरफ़ोन के उपरी हिस्से में धातु के तार को जोड़ दीजिये। और ऊँची जगह पर ले जाईये और स्पीकर ऑन करके रेडियो का लुफ्त उठाईये।

‘बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता’ क्या इस प्रश्न का जवाब आपको मिल गया ।

बिना इयरफोन के मोबाइल मे रेडियो क्यों नहीं चलता ये पोस्ट अगर आपको अच्छी लगी तो comment करके ज़रूर बताएं 

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